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## [[अभिधेयप्रयोजनसम्बन्धप्रकरणम्]] | |||
## [[प्रमाणलक्षणप्रकरणम्]] | |||
## [[प्रमेयलक्षणप्रकरणम्]] | |||
## [[न्यायपूर्वाङ्गलक्षणप्रकरणम्]] | |||
## [[न्यायाश्रयसिद्धान्तलक्षणप्रकरणम्]] | |||
## [[न्यायस्वरूपप्रकरणम्]] | |||
## [[न्यायोत्तराङ्गप्रकरणम्]] | |||
# '''द्वितीयाह्निकम्''' | |||
## [[कथालक्षण प्रकरणम्]] | |||
## [[हेत्वाभासलक्षणप्रकरणम्]] | |||
## [[छललक्षणप्रकरणम्]] | |||
## [[पुरुषाशक्तिलिङ्गदोषसामान्यलक्षणप्रकरणम्]] | |||
* '''<big><u>अथ द्वितीयोऽध्यायः</u></big>''' | |||
# '''प्रथमाह्निकम्''' | |||
##[[संशयपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
##[[प्रमाणसामान्यपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
##[[प्रत्यक्षपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
##[[प्रासङ्गिकमवयविपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
##[[अनुमानपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
##[[वर्तमानपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
##[[उपमानपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
##[[शब्दसामान्यपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
##[[शब्दविशेषपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
#'''द्वितीयाह्निकम्''' | |||
##[[प्रमाणचतुष्ट्वपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
##[[शब्दानित्यत्वप्रकरणम्]] | |||
##[[शब्दपरिणामप्रकरणम्]] | |||
##[[शब्दशक्तिपरीक्षा (पदार्थनिरुपण) प्रकरणम्]] | |||
* '''<big><u>अथ तृतीयोऽध्यायः</u></big>''' | |||
# '''प्रथमाह्निकम्''' | |||
##[[इन्द्रियव्यतिरेकात्मप्रकरणम्]] | |||
##[[शरीरव्यतिरेकात्मप्रकरणम्]] | |||
##[[प्रासङ्गिक चतुरद्वैतप्रकरणम्]] | |||
##[[मनोव्यतिरेकात्मप्रकरणम्]] | |||
##[[नित्यताप्रकरणम्]] | |||
##[[शरीरपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
##[[इन्द्रिय ( भौतिकत्व ) परीक्षाप्रकरणम्]] | |||
##[[इन्द्रियनानात्वप्रकरणम्]] | |||
##[[अर्थपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
#'''द्वितीयाह्निकम्''' | |||
##[[बुद्ध्यनित्यनाप्रकरणम्]] | |||
##[[क्षणभङ्गपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
##[[बुद्धेरात्मगुणत्वप्रकरणम्]] | |||
##[[बुद्धेरुत्पत्रापवर्गित्वप्रकरणम्]] | |||
##[[बुद्धेश्शरीरगुणव्यतिरेकप्रकरणम्]] | |||
##[[मनः परीक्षाप्रकरणम्]] | |||
##[[प्रासङ्गिकमदृष्टनिष्पाद्यत्वप्रकरणम्|प्रासङ्गिकमदृष्टनिष्पाद्यत्वप्रकरण]] | |||
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*'''<big><u>अथ चतुर्थोऽध्यायः</u></big>''' | |||
# '''प्रथमाह्निकम्''' | |||
## [[प्रवृतिदोषसामान्यपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
## [[दोषत्रैराश्यप्रकरणम्]] | |||
## [[प्रेत्यभावपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
## [[शून्यतोपादानप्रकरणम्]] | |||
## [[ईश्वरोपादानताप्रकरणम्]] | |||
## [[आकस्मिकत्वप्रकरणम्]] | |||
## [[सर्वानित्यत्वनिराकरणम्]] | |||
## [[सर्वनित्यत्वनिराकरणप्रकरणम्]] | |||
## [[सर्वपृथक्तवप्रकरणम्]] | |||
## [[सर्वशून्यतानिराकरणप्रकरणम्]] | |||
## [[संख्यैकान्तवादप्रकरणम्]] | |||
## [[फलपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
## [[दुःखपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
## [[अपवर्गपरीक्षाप्रकरणम्]] | |||
# '''द्वितीयाह्निकम्''' | |||
## [[तत्त्वज्ञोनोत्पत्तिप्रकरणम्]] | |||
## [[प्रासङ्गिकमवयवावयविप्रकरणम्]] | |||
## [[निरवयवप्रकरणम्]] | |||
## [[बाह्यार्थभङ्गनिराकरणप्रकरणम्]] | |||
## [[तत्त्वज्ञानविवृद्धिप्रकरणम्]] | |||
## [[तत्त्वज्ञानपरिपालनप्रकरणम्]] | |||
* '''<big><u>अथ पञ्चमोऽध्यायः</u></big>''' | |||
# '''प्रथमाह्निकम्''' | |||
## [[सत्प्रतिपक्षदेशनाभासप्रकरणम्]] | |||
## [[साध्यदृष्टान्तधर्मविकल्पप्रभवोत्कर्षसमादिजातिषट्कप्रकरणम्]] | |||
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## [[प्रतिज्ञाहेत्वन्यतराश्रितनिग्रहस्थानपञ्चकविशेषलक्षणप्रकरणम्]] | |||
## [[प्रकृतोपयोगिवाक्यार्थप्रतिपत्तिफलशून्यनिग्रहस्थानचतुष्कप्रकरणम्]] | |||
## [[स्वसिद्धान्तानुरूपप्रयोगाभासनिग्रहस्थानत्रिकप्रकरणम्]] | |||
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'''अस्मिन्यायशास्त्रेऽध्यायाः ५, आह्निकानि १०, प्रकरणानि ८४,''' | |||
'''सूत्राणि ५२८, पदानि १९६६, अक्षराणि ८३८५।''' | |||
'''<big>यदलम्भि किमपि पुण्यं दुस्तरकुनिबन्धपङ्कमग्रानाम् ।</big>''' | |||
'''<big>श्रीगौतमसुगवीनामतिजरतीनां समुद्धरणात् ।।१।।</big>''' | |||
'''<big>संसारजलधिसेतौ वृषकेतौ सकलदुःखशमहेतौ ।</big>''' | |||
'''<big>एतस्य फलमखिलर्पितमेतेन प्रीयतामीशः ।।२।।</big>''' | |||
'''<big>न्यायसूचीनिबन्धोऽसावकारि सुधियां मुदे ।</big>''' | |||
'''<big>श्रीवाचस्पतिमिश्रेण वस्वङ्कवसुवत्सरे ।। ३।।</big>''' | |||
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Revision as of 15:45, 30 June 2025
- अथ प्रथमोऽध्यायः
- प्रथमाह्निकम्
- द्वितीयाह्निकम्
- अथ द्वितीयोऽध्यायः
- प्रथमाह्निकम्
- द्वितीयाह्निकम्
- अथ तृतीयोऽध्यायः
- प्रथमाह्निकम्
- द्वितीयाह्निकम्
- अथ चतुर्थोऽध्यायः
- प्रथमाह्निकम्
- प्रवृतिदोषसामान्यपरीक्षाप्रकरणम्
- दोषत्रैराश्यप्रकरणम्
- प्रेत्यभावपरीक्षाप्रकरणम्
- शून्यतोपादानप्रकरणम्
- ईश्वरोपादानताप्रकरणम्
- आकस्मिकत्वप्रकरणम्
- सर्वानित्यत्वनिराकरणम्
- सर्वनित्यत्वनिराकरणप्रकरणम्
- सर्वपृथक्तवप्रकरणम्
- सर्वशून्यतानिराकरणप्रकरणम्
- संख्यैकान्तवादप्रकरणम्
- फलपरीक्षाप्रकरणम्
- दुःखपरीक्षाप्रकरणम्
- अपवर्गपरीक्षाप्रकरणम्
- द्वितीयाह्निकम्
- अथ पञ्चमोऽध्यायः
- प्रथमाह्निकम्
- सत्प्रतिपक्षदेशनाभासप्रकरणम्
- साध्यदृष्टान्तधर्मविकल्पप्रभवोत्कर्षसमादिजातिषट्कप्रकरणम्
- प्राप्त्यप्राप्तियुगनद्धवाहिविकल्पोपक्रमजातिद्वयप्रकरणम्
- युगनद्धवाहिप्रसङ्गप्रतिदृष्टान्तसमाजातिद्वयप्रकरणम्
- अनुत्पत्तिसमप्रकरणम्
- संशयसमप्रकरणम्
- प्रकरणसमप्रकरणम्
- हेतुसमप्रकरणम्
- अर्थापत्तिसमप्रकरणम्
- अविशेषसमप्रकरणम्
- उपपत्तिसमप्रकरणम्
- उपलब्धिसमप्रकरणम्
- अनुपलब्धिसमप्रकरणम्
- अनित्यसमप्रकरणम्
- नित्यसमप्रकरणम्
- कार्यसमप्रकरणम्
- षट्पक्षीरूपकथाभासप्रकरणम्
- द्वितीयाह्निकम्
- प्रतिज्ञाहेत्वन्यतराश्रितनिग्रहस्थानपञ्चकविशेषलक्षणप्रकरणम्
- प्रकृतोपयोगिवाक्यार्थप्रतिपत्तिफलशून्यनिग्रहस्थानचतुष्कप्रकरणम्
- स्वसिद्धान्तानुरूपप्रयोगाभासनिग्रहस्थानत्रिकप्रकरणम्
- पुनरुक्तनिग्रहस्थानप्रकरणम्
- उत्तरविरोधिनिग्रहस्थानचतुष्कप्रकरणम्
- दोषनिरूप्यमतानुज्ञादिनिग्रहस्थानत्रिकप्रकरणम्
- कथकान्योक्तिनिरूप्यनिग्रहस्थानद्वयप्रकरणम्
अस्मिन्यायशास्त्रेऽध्यायाः ५, आह्निकानि १०, प्रकरणानि ८४,
सूत्राणि ५२८, पदानि १९६६, अक्षराणि ८३८५।
यदलम्भि किमपि पुण्यं दुस्तरकुनिबन्धपङ्कमग्रानाम् ।
श्रीगौतमसुगवीनामतिजरतीनां समुद्धरणात् ।।१।।
संसारजलधिसेतौ वृषकेतौ सकलदुःखशमहेतौ ।
एतस्य फलमखिलर्पितमेतेन प्रीयतामीशः ।।२।।
न्यायसूचीनिबन्धोऽसावकारि सुधियां मुदे ।
श्रीवाचस्पतिमिश्रेण वस्वङ्कवसुवत्सरे ।। ३।।