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* '''<big>अथ द्वितीयोऽध्यायः</big>''' | * '''<big><u>अथ द्वितीयोऽध्यायः</u></big>''' | ||
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##[[शब्दशक्तिपरीक्षा (पदार्थनिरुपण) प्रकरणम्]] | ##[[शब्दशक्तिपरीक्षा (पदार्थनिरुपण) प्रकरणम्]] | ||
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## प्रवृतिदोषसामान्यपरीक्षाप्रकरणम् | ## प्रवृतिदोषसामान्यपरीक्षाप्रकरणम् | ||
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## तत्त्वज्ञानविवृद्धिप्रकरणम् | ## तत्त्वज्ञानविवृद्धिप्रकरणम् | ||
## तत्त्वज्ञानपरिपालनप्रकरणम् | ## तत्त्वज्ञानपरिपालनप्रकरणम् | ||
* '''<big>अथ पञ्चमोऽध्यायः</big>''' | * '''<big><u>अथ पञ्चमोऽध्यायः</u></big>''' | ||
# '''प्रथमाह्निकम्''' | # '''प्रथमाह्निकम्''' | ||
## सत्प्रतिपक्षदेशनाभासप्रकरणम् | ## सत्प्रतिपक्षदेशनाभासप्रकरणम् | ||
Revision as of 17:30, 7 February 2025
- अथ प्रथमोऽध्यायः
- प्रथमाह्निकम्
- द्वितीयाह्निकम्
- अथ द्वितीयोऽध्यायः
- प्रथमाह्निकम्
- द्वितीयाह्निकम्
- अथ तृतीयोऽध्यायः
- प्रथमाह्निकम्
- द्वितीयाह्निकम्
- अथ चतुर्थोऽध्यायः
- प्रथमाह्निकम्
- प्रवृतिदोषसामान्यपरीक्षाप्रकरणम्
- दोषत्रैराश्यप्रकरणम्
- प्रेत्यभावपरीक्षाप्रकरणम्
- शून्यतोपादानप्रकरणम्
- ईश्वरोपादानताप्रकरणम्
- आकस्मिकत्वप्रकरणम्
- सर्वानित्यत्वनिराकरणम्
- सर्वनित्यत्वनिराकरणप्रकरणम्
- सर्वपृथक्तवप्रकरणम्
- सर्वशून्यतानिराकरणप्रकरणम्
- संख्यैकान्तवादप्रकरणम्
- फलपरीक्षाप्रकरणम्
- दुःखपरीक्षाप्रकरणम्
- अपवर्गपरीक्षाप्रकरणम्
- द्वितीयाह्निकम्
- तत्त्वज्ञोनोत्पत्तिप्रकरणम्
- प्रासङ्गिकमवयवावयविप्रकरणम्
- निरवयवप्रकरणम्
- बाह्यार्थभङ्गनिराकरणप्रकरणम्
- तत्त्वज्ञानविवृद्धिप्रकरणम्
- तत्त्वज्ञानपरिपालनप्रकरणम्
- अथ पञ्चमोऽध्यायः
- प्रथमाह्निकम्
- सत्प्रतिपक्षदेशनाभासप्रकरणम्
- साध्यदृष्टान्तधर्मविकल्पप्रभवोत्कर्षसमादिजातिषट्कप्रकरणम्
- प्राप्त्यप्राप्तियुगनद्धवाहिविकल्पोपक्रमजातिद्वयप्रकरणम्
- सूत्रैर्युगनद्धवाहिप्रसङ्गप्रतिदृष्टान्तसमाजातिद्वयप्रकरणम्
- सूत्राभ्यामनुत्पत्तिसमप्रकरणम्
- संशयसमप्रकरणम्
- प्रकरणसमप्रकरणम्
- सूत्रैहेतुसमप्रकरणम्
- सूत्राभ्यामर्थापत्तिसमप्रकरणम्
- सूत्राभ्यामविशेषसमप्रकरणम्
- सूत्राभ्यामुपपत्तिसमप्रकरणम्
- सूत्राभ्यामुपलब्धिसमप्रकरणम्
- सूत्रैरनुपलब्धिसमप्रकरणम्
- सूत्रैरनित्यसमप्रकरणम्
- नित्यसमप्रकरणम्
- कार्यसमप्रकरणम्
- षट्पक्षीरूपकथाभासप्रकरणम्
- द्वितीयाह्निकम्
- प्रतिज्ञाहेत्वन्यतराश्रितनिग्रहस्थानपञ्चकविशेषलक्षणप्रकरणम्
- प्रकृतोपयोगिवाक्यार्थप्रतिपत्तिफलशून्यनिग्रहस्थानचतुष्कप्रकरणम्
- स्वसिद्धान्तानुरूपप्रयोगाभासनिग्रहस्थानत्रिकप्रकरणम्
- पुनरुक्तनिग्रहस्थानप्रकरणम्
- सूत्रैरुत्तरविरोधिनिग्रहस्थानचतुष्कप्रकरणम्
- सूत्रैर्दोषनिरूप्यमतानुज्ञादिनिग्रहस्थानत्रिकप्रकरणम्
- कथकान्योक्तिनिरूप्यनिग्रहस्थानद्वयप्रकरणम्
अस्मिन्यायशास्त्रेऽध्यायाः ५, आह्निकानि १०, प्रकरणानि ८४,
सूत्राणि ५२८, पदानि १९६६, अक्षराणि ८३८५।
यदलम्भि किमपि पुण्यं दुस्तरकुनिबन्धपङ्कमग्रानाम् ।
श्रीगौतमसुगवीनामतिजरतीनां समुद्धरणात् ।।१।।
संसारजलधिसेतौ वृषकेतौ सकलदुःखशमहेतौ ।
एतस्य फलमखिलर्पितमेतेन प्रीयतामीशः ।।२।।
न्यायसूचीनिबन्धोऽसावकारि सुधियां मुदे ।
श्रीवाचस्पतिमिश्रेण वस्वङ्कवसुवत्सरे ।। ३।।