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प्रसिद्धसाधर्म्यात् साध्यसाधनमुपमानम् |
संधि विच्छेद:
प्रसिद्धसाधर्म्यात् = प्रसिद्ध + साधर्म्यात्
साध्यसाधनम् = साध्य + साधनम्
उपमानम् = उपमान + म्
अर्थ:
- प्रसिद्ध: पहले से ज्ञात या परिचित।
- साधर्म्यात्: समानता या साम्यता के आधार पर।
- साधर्म्य: समानता।
- -आत्: कारण का सूचक (के आधार पर)।
- साध्यसाधनम्: वह प्रक्रिया जिसके द्वारा किसी अज्ञात वस्तु (साध्य) को सिद्ध किया जाए।
- साध्य: जिसे सिद्ध करना है।
- साधनम्: माध्यम या साधन।
- उपमानम्: तुलना या उदाहरण के आधार पर ज्ञान प्राप्त करना।
व्याख्या:
यह उपमान (comparison or analogy) की परिभाषा है, जो न्याय दर्शन के चार प्रमाणों में से एक है।
- उपमान वह प्रमाण है, जिसमें किसी प्रसिद्ध वस्तु और अज्ञात वस्तु के बीच समानता के आधार पर अज्ञात वस्तु का ज्ञान प्राप्त होता है।
प्रक्रिया:
- एक वस्तु (उपमेय) पहले से ज्ञात होती है।
- दूसरी वस्तु (उपमान) से समानता के आधार पर अज्ञात वस्तु के बारे में ज्ञान प्राप्त होता है।
- यह ज्ञान मुख्यतः किसी अज्ञात वस्तु के नाम, गुण, या स्वरूप को समझने के लिए होता है।
उदाहरण:
- गुरु ने बताया कि "गवय" (जंगली बैल) गाय के समान होता है।
- जंगल में जाकर, जब किसी ने गवय को देखा, तो उसे उसकी पहचान हो गई क्योंकि वह गाय के समान दिखता है।
सार:
- प्रसिद्धसाधर्म्यात्: गाय और गवय के बीच समानता।
- साध्यसाधनम्: गवय की पहचान करना।
- उपमानम्: गाय के समानता का ज्ञान होने के कारण गवय का ज्ञान प्राप्त हुआ।
निष्कर्ष:
उपमान वह प्रमाण है जो समानता के आधार पर अज्ञात वस्तु (साध्य) को जानने का माध्यम बनता है।