1/1/6

From IKS BHU
Jump to navigation Jump to search

प्रसिद्धसाधर्म्यात् साध्यसाधनमुपमानम् |


संधि विच्छेद:

प्रसिद्धसाधर्म्यात् = प्रसिद्ध + साधर्म्यात्

साध्यसाधनम् = साध्य + साधनम्

उपमानम् = उपमान + म्


अर्थ:

  1. प्रसिद्ध: पहले से ज्ञात या परिचित।
  2. साधर्म्यात्: समानता या साम्यता के आधार पर।
    • साधर्म्य: समानता।
    • -आत्: कारण का सूचक (के आधार पर)।
  3. साध्यसाधनम्: वह प्रक्रिया जिसके द्वारा किसी अज्ञात वस्तु (साध्य) को सिद्ध किया जाए।
    • साध्य: जिसे सिद्ध करना है।
    • साधनम्: माध्यम या साधन।
  4. उपमानम्: तुलना या उदाहरण के आधार पर ज्ञान प्राप्त करना।

व्याख्या:

यह उपमान (comparison or analogy) की परिभाषा है, जो न्याय दर्शन के चार प्रमाणों में से एक है।

  • उपमान वह प्रमाण है, जिसमें किसी प्रसिद्ध वस्तु और अज्ञात वस्तु के बीच समानता के आधार पर अज्ञात वस्तु का ज्ञान प्राप्त होता है।

प्रक्रिया:

  1. एक वस्तु (उपमेय) पहले से ज्ञात होती है।
  2. दूसरी वस्तु (उपमान) से समानता के आधार पर अज्ञात वस्तु के बारे में ज्ञान प्राप्त होता है।
  3. यह ज्ञान मुख्यतः किसी अज्ञात वस्तु के नाम, गुण, या स्वरूप को समझने के लिए होता है।

उदाहरण:

  • गुरु ने बताया कि "गवय" (जंगली बैल) गाय के समान होता है।
  • जंगल में जाकर, जब किसी ने गवय को देखा, तो उसे उसकी पहचान हो गई क्योंकि वह गाय के समान दिखता है।

सार:

  • प्रसिद्धसाधर्म्यात्: गाय और गवय के बीच समानता।
  • साध्यसाधनम्: गवय की पहचान करना।
  • उपमानम्: गाय के समानता का ज्ञान होने के कारण गवय का ज्ञान प्राप्त हुआ।

निष्कर्ष:

उपमान वह प्रमाण है जो समानता के आधार पर अज्ञात वस्तु (साध्य) को जानने का माध्यम बनता है।