Sbg 9.7 htshg
Jump to navigation
Jump to search
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।9.7।।इस प्रकार जगत्के स्थितिकालमें? आकाशमें वायुकी भाँति? मुझमें स्थित जो समस्त भूत हैं वे --, सम्पूर्ण प्राणी? हे कुन्तीपुत्र प्रलयकालमें मेरी त्रिगुणमयी -- अपरानिकृष्ट प्रकृतिको प्राप्त हो जाते हैं और फिर कल्पके आदिमें अर्थात् उत्पत्तिकालमें मैं पहलेकी भाँति पुनः उन प्राणियोंको रचता हूँ -- उत्पन्न करता हूँ।