Sbg 9.34 htshg

From IKS BHU
Jump to navigation Jump to search

Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।9.34।।किस प्रकार ( भजनसेवा करें सो कहा जाता है -- )


तू मन्मना -- मुझमें ही मनवाला हो। मद्भक्त -- मेरा ही भक्त हो। मद्याजी -- मेरा ही पूजन करनेवाला हो और मुझे ही नमस्कार किया कर। इस प्रकार चित्तको मुझमें लगाकर मेरे परायण -- शरण हुआ तू मुझ,परमेश्वरको ही प्राप्त हो जायगा। अभिप्राय यह कि मैं ही सब भूतोंका आत्मा और परमगति -- परम स्थान हूँ? ऐसा जो मैं आत्मरूप हूँ उसीको तू प्राप्त हो जायगा। इस प्रकार पहलेके माम् शब्दसे आत्मानम् शब्दका सम्बन्ध है।