Sbg 9.20 htshg

From IKS BHU
Jump to navigation Jump to search

Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।9.20।।परंतु जो विषयवासनायुक्त अज्ञानी --, ऋक्? यजु और साम -- इन तीनों वेदोंको जाननेवाले? सोमरसका पान करनेवाले और पापरहित हुए अर्थात् सोमरसका पान करनेसे जिनके पाप नष्ट हो गये हैं ऐसे सकाम पुरुष वसु आदि देवोंके रूपमें स्थित मुझ परमात्माका अग्निष्टोमादि यज्ञोंद्वारा पूजन करके स्वर्गप्राप्तिकी इच्छा करते हैं। वे अपने पुण्यके फलस्वरूप इन्द्रके स्थानको पाकर स्वर्गमें देवताओंके दिव्य भोगोंको भोगते हैं अर्थात् देवताओंके जो स्वर्गमें होनेवाले अप्राकृत भोग हैं उनको भोगते हैं।