Sbg 9.1 htshg

From IKS BHU
Jump to navigation Jump to search

Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।9.1।।वहाँ (यह शङ्का होती है कि ) क्या इस प्रकार साधन करनेसे ही मोक्षप्राप्तिरूप फल मिलता है अन्य किसी प्रकारसे नहीं मिलता इस शङ्काको निवृत्त करनेकी इच्छासे श्रीभगवान् बोले --, जो ब्रह्मज्ञान आगे कहा जायगा और जो कि पूर्वके अध्यायोंमें भी कहा जा चुका है? उसको बुद्धिके सामने रखकर यहाँ इदम् शब्दका प्रयोग किया है। तु शब्द अन्यान्य ज्ञानोंसे इसे अलग करके विशेषतासे लक्ष्य करानेके लिये है। यही यथार्थ ज्ञान साक्षात् मोक्षप्राप्तिका साधन है। जो कि सब कुछ वासुदेव ही है आत्मा ही यह समस्त जगत् है ब्रह्म अद्वितीय एक ही है इत्यादि श्रुतिस्मृतियोंसे दिखलाया गया है? ( इसके अतिरिक्त ) और कोई ( मोक्षका साधन ) नहीं है। जो इससे विपरीत जानते हैं वे अपनेसे भिन्न अपना स्वामी माननेवाले मनुष्य विनाशशील लोकोंको प्राप्त होते हैं इत्यादि श्रुतियोंसे भी यही सिद्ध होता है। तुझ असूयारहित भक्तसे मैं यह अति गोपनीय विषय कहूँगा। वह क्या है ज्ञान। कैसा ज्ञान विज्ञानसहित अर्थात् अनुभवसहित ज्ञान। जिस ज्ञानको जानकर अर्थात् पाकर तू संसाररूप बन्धनसे मुक्त हो जायगा।