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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।8.23।।जिन्होंने ओंकारमें ब्रह्मबुद्धि सम्पादन की है जिन्हें कालान्तरमें मुक्ति मिलनेवाली है तथा यहाँ जिनका प्रकरण चल रहा है उन योगियोंकी ब्रह्मप्राप्तिके लिये आगेका मार्ग बताना चाहिये। अतः विवक्षित अर्थको बतलानेके लिये ही यत्र काले इत्यादि अगले श्लोक कहे जाते हैं। यहाँ पुनरावर्ती मार्गका वर्णन दूसरे मार्गकी स्तुति करनेके लिये किया गया है --, यत्र काले इस पदका व्यवधानयुक्त प्रयाताः इस अगले पदसे सम्बन्ध है। जिस कालमें अनावृत्तिको -- अपुनर्जन्मको और जिस कालमें आवृत्तिको -- उससे विपरीत पुनर्जन्मको योगी लोग पाते हैं। योगिनः इस पदसे कर्म करनेवाले कर्मी लोग भी योगी कहे गये हैं क्योंकि कर्मयोगेन योगिनाम् इस विशेषणसे कर्मी भी किसी गुणविशेषसे योगी हैं। तात्पर्य यह है कि अर्जुन जिस कालमें मरे हुए योगी लोग पुनर्जन्मको नहीं पाते और जिस कालमें मरे हुए लोग पुनर्जन्म पाते हैं मैं अब उस कालका वर्णन करता हूँ।