Sbg 7.8 htshg
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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।7.8।।यह समस्त जगत् किसकिस धर्मसे युक्त आपमें पिरोया हुआ है इसपर कहते हैं जलमें मैं रस हूँ अर्थात् जलका जो सार है उसका नाम रस है उस रसरूप मुझ परमात्मामें समस्त जल पिरोया हुआ है। ऐसे ही और सबमें भी समझना चाहिये। जैसे जलमें मैं रस हूँ वैसे ही चन्द्रमा और सूर्यमें मैं प्रकाश हूँ। समस्त वेदोंमें मैं ओंकार हूँ अर्थात् उस ओंकाररूप मुझ परमात्मामें सब वेद पिरोये हुए हैं। आकाशमें उसका सारभूत शब्द हूँ अर्थात् उस शब्दरूप मुझ ईश्वरमें आकाश पिरोया हुआ है। तथा पुरुषोंमें मैं पौरुष हूँ अर्थात् पुरुषोंमें जो पुरुषत्व है जिससे उनको पुरुष समझा जाता है वह मैं हूँ उस पौरूषरूप मुझ ईश्वरमें पुरुष पिरोये हुए हैं।