Sbg 7.5 scsri
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Sanskrit Commentary By Sri Sridhara Swami ।।7.5।।अपरामिमां प्रकृतिमुपसंहरन्परां प्रकृतिमाह अपरेति। अष्टधोक्ता या प्रकृतिरियमपरा निकृष्टा जडत्वात्परार्थत्वाच्च इतः सकाशात्परां प्रकृष्टामन्यां जीवस्वरूपां मे प्रकृतिं विद्धि जानीहि। परत्वे हेतुः यया चेतनया क्षेत्रज्ञरूपया स्वकर्मद्वारेणेदं जगद्धार्यते।