Sbg 7.3 htshg

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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।7.3।।यह ( दुलर्भ ) कैसे है सो कहते हैं हजारों मनुष्योंमें कोई एक ही ( मोक्षरूप ) सिद्धिके लिये प्रयत्न करता है और उन यत्न करनेवाले सिद्धोंमें भी जो मोक्षके लिये यत्न करते हैं वे ( एक तरहसे ) सिद्ध ही हैं उनमें भी कोई एक ही मुझे तत्त्वसे यथार्थ जान पाता है।