Sbg 7.24 htrskd

From IKS BHU
Jump to navigation Jump to search

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas ।।7.24।। बुद्धिहीन मनुष्य मेरे सर्वश्रेष्ठ अविनाशी परमभावको न जानते हुए अव्यक्त (मन-इन्द्रियोंसे पर) मुझ सच्चिदानन्दघन परमात्माको मनुष्यकी तरह ही शरीर धारण करनेवाला मानते हैं।