Sbg 7.23 htshg
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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।7.23।।क्योंकि वे कामी और अविवेकी पुरुष विनाशशील साधनकी चेष्टा करनेवाले होते हैं इसलिये उन अल्पबुद्धिवालोंका वह फल नाशवान् विनाशशील होता है। देवयाजी अर्थात् जो देवोंका पूजन करनेवाले हैं वे देवोंको पाते हैं और मेरे भक्त मुझको ही पाते हैं। अहो बड़े दुःखकी बात है कि इस प्रकार समानपरिश्रम होनेपर भी लोग अनन्त फलकी प्राप्ति के लिये केवल मुझ परमेश्वरकी ही शरणमें नहीं आते। इस प्रकार भगवान् करुणा प्रकट करते हैं।