Sbg 6.14 htrskd
Jump to navigation
Jump to search
Hindi Translation By Swami Ramsukhdas ।।6.14।। जिसका अन्तःकरण शान्त है, जो भय-रहित है और जो ब्रह्मचारिव्रतमें स्थित है, ऐसा सावधान योगी मनका संयम करके मेरेमें चित्त लगाता हुआ मेरे परायण होकर बैठे।