Sbg 6.13 htrskd
Jump to navigation
Jump to search
Hindi Translation By Swami Ramsukhdas ।।6.13।। काया, शिर और ग्रीवाको सीधे अचल धारण करके तथा दिशाओंको न देखकर केवल अपनी नासिकाके अग्रभागको देखते हुए स्थिर होकर बैठे।
Hindi Translation By Swami Ramsukhdas ।।6.13।। काया, शिर और ग्रीवाको सीधे अचल धारण करके तथा दिशाओंको न देखकर केवल अपनी नासिकाके अग्रभागको देखते हुए स्थिर होकर बैठे।