Sbg 5.21 httyn

From IKS BHU
Jump to navigation Jump to search

Hindi Translation By Swami Tejomayananda ।।5.21।। बाह्य विषयों में आसक्तिरहित अन्त:करण वाला पुरुष आत्मा में ही सुख प्राप्त करता है;  ब्रह्म के ध्यान में समाहित चित्त वाला पुरुष अक्षय सुख प्राप्त करता है।।