Sbg 5.16 htshg
Jump to navigation
Jump to search
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।5.16।।जिन जीवोंके अन्तःकरणका वह अज्ञान जिस अज्ञानसे आच्छादित हुए जीव मोहित होते हैं आत्मविषयक विवेकज्ञानद्वारा नष्ट हो जाता है उनका वह ज्ञान सूर्यकी भाँति उस परम परमार्थतत्त्वको प्रकाशित कर देता है। अर्थात् जैसे सूर्य समस्त रूपमात्रको प्रकाशित कर देता है वैसे ही उनका ज्ञान समस्त ज्ञेय वस्तुको प्रकाशित कर देता है।