Sbg 4.9 httyn

From IKS BHU
Jump to navigation Jump to search

Hindi Translation By Swami Tejomayananda ।।4.9।। हे अर्जुन ! मेरा जन्म और कर्म दिव्य है,  इस प्रकार जो पुरुष तत्त्वत:  जानता है, वह शरीर को त्यागकर फिर जन्म को नहीं प्राप्त होता;  वह मुझे ही प्राप्त होता है।।