Sbg 3.30 htshg
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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।3.30।।तो फिर कर्माधिकारी अज्ञानी मुमुक्षुको किस प्रकार कर्म करना चाहिये सो कहते हैं मुझ सर्वात्मरूप सर्वज्ञ परमेश्वर वासुदेवमें विवेकबुद्धिसे सब कर्म छोड़कर अर्थात् मैं सब कर्म ईश्वरके लिये सेवककी तरह कर रहा हूँ इस बुद्धिसे सब कर्म मुझमें अर्पण करके तथा निराशी आशारहित और निर्मम यानी जिसका मेरापन सर्वथा नष्ट हो चुका हो उसे निर्मम कहते हैं ऐसा होकर तू शोकरहित हुआ युद्ध कर अर्थात् चिन्तासंतापसे रहित हुआ युद्ध कर।