Sbg 2.42 htshg
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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।2.42।।जिनमें निश्चयात्मिका बुद्धि नहीं है वे
इस आगे कही जानेवाली पुष्पित वृक्षोंजैसी शोभित सुननेमें ही रमणीय जिस वाणीको कहा करते हैँ।
कौन कहा करते हैं अज्ञानी अर्थात् अल्पबुद्धिवाले अविवेकी जो कि बहुत अर्थवाद और फलसाधनोंको प्रकाश करनेवाले वेदवाक्योंमें रत हैं।
तथा हे पार्थ जो ऐसे भी कहनेवाले हैं कि स्वर्गप्राप्ति आदि फलके साधनरूप कर्मोंसे अतिरिक्त अन्य कुछ है ही नहीं।