Sbg 2.34 htshg
Jump to navigation
Jump to search
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।2.34।।केवल स्वधर्म और कीर्तिका त्याग होगा इतना ही नहीं
सब लोग तेरी बहुत दिनोंतक स्थायी रहनेवाली अपकीर्ति ( निन्दा ) भी किया करेंगे। धर्मात्मा शूरवीर इत्यादि गुणोंसे प्रतिष्ठा पाये हुए पुरुषके लिये अपकीर्ति मरणसे भी अधिक होती है। अभिप्राय यह है कि संभावित ( इज्जतदार ) पुरुषके लिये अपकीर्तिकी अपेक्षा मरना अच्छा है।