Sbg 2.23 htshg

From IKS BHU
Jump to navigation Jump to search

Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।2.23।।आत्मा सदा निर्विकार किस कारणसे है सो कहते हैं


इस उपर्युक्त आत्माको शस्त्र नहीं काटते अभिप्राय यह कि अवयवरहित होनेके कारण तलवार आदि शस्त्र इसके अङ्गोंके टुकड़े नहीं कर सकते।

वैसे ही अग्नि इसको जला नहीं सकता अर्थात् अग्नि भी इसको भस्मीभूत नहीं कर सकता।



जल इसको भिगो नहीं सकता क्योंकि सावयव वस्तुको ही भिगोकर उसके अङ्गोंको पृथक्पृथक् कर देनेमें जलकी सामर्थ्य है। निरवयव आत्मामें ऐसा होना सम्भव नहीं।

उसी तरह वायु आर्द्र द्रव्यका गीलापन शोषण करके उसको नष्ट करता है अतः वह वायु भी इस स्वस्वरूप आत्माका शोषण नहीं कर सकता।