Sbg 18.77 scanand
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Sanskrit Commentary By Sri Anandgiri ।।18.77।।यत्तु विश्वरूपाख्यं रूपं स्वगुणमर्जुनाय भगवान्दर्शितवान्ध्यानार्थं तदिदानीं स्तौति -- तच्चेति।
Sanskrit Commentary By Sri Anandgiri ।।18.77।।यत्तु विश्वरूपाख्यं रूपं स्वगुणमर्जुनाय भगवान्दर्शितवान्ध्यानार्थं तदिदानीं स्तौति -- तच्चेति।