Sbg 18.71 htshg

From IKS BHU
Jump to navigation Jump to search

Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।18.71।।तथा श्रोताको यह ( आगे बतलाया जानेवाला ) फल मिलता है --, जो मनुष्य? इस ग्रन्थको श्रद्धायुक्त और दोषदृष्टिरहित होकर केवल सुनता ही है? वह भी पापोंसे मुक्त होकर? पुण्यकारियोंके अर्थात् अग्निहोत्रादि श्रेष्ठकर्म करनेवालोंके? शुभ लोकोंको प्राप्त हो जाता है। अपिशब्दसे यह पाया जाता है कि अर्थ समझनेवालेकी तो बात ही क्या है। शिष्यने शास्त्रका अभिप्राय ग्रहण किया या नहीं यह विवेचन करनेके लिये भगवान् पूछते हैं। इसमें पूछनेवालेका यह अभिप्राय है कि शास्त्रका अभिप्राय श्रोताने ग्रहण नहीं किया है -- यह मालूम होनेपर? फिर किसी और उपायसे ग्रहण कराऊँगा।