Sbg 18.65 htshg

From IKS BHU
Jump to navigation Jump to search

Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।18.65।।वे वचन कौनसे हैं सो कहते हैं --, तू मुझमें मनवाला अर्थात् मुझमें चित्तवाला हो? मेरा भक्त अर्थात् मेरा ही भजन करनेवाला हो और मेरा ही पूजन करनेवाला हो? तथा मुझे ही नमस्कार कर? अर्थात् नमस्कार भी मुझे ही किया कर। इस प्रकार करता हुआ? अर्थात् मुझ वासुदेवमें ही ( अपने ) समस्त साध्य? साधन और प्रयोजनको समर्पण करके तू मुझे ही प्राप्त होगा। इस विषयमें मैं तुझसे सत्य प्रतिज्ञा करता हूँ क्योंकि तू मेरा प्रिय है। कहनेका अभिप्राय यह है कि इस प्रकार भगवान्को सत्यप्रतिज्ञ जानकर तथा भगवान्की भक्तिका फल निःसन्देह -- ऐकान्तिक मोक्ष है -- यह समझकर? मनुष्यको केवल एकमात्र भगवान्की शरणमें ही तत्पर हो जाना चाहिये।