Sbg 18.46 htshg
Jump to navigation
Jump to search
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।18.46।।जिस अन्तर्यामी ईश्वरसे समस्त प्राणियोंकी प्रवृत्ति यानी उत्पत्ति या चेष्टा होती है और जिस ईश्वरसे यह सारा जगत् व्याप्त है? उस ईश्वरको प्रत्येक वर्णके लिये पहले बतलाये हुए अपने कर्मोंद्वारा पूजकर -- उसकी आराधना करके मनुष्य केवल ज्ञाननिष्ठाकी योग्यतारूप सिद्धि प्राप्त कर लेता है।