Sbg 18.45 scram
Jump to navigation
Jump to search
Sanskrit Commentary By Sri Ramanuja ।।18.45।। स्वे स्वे यथोदिते कर्मणि अभिरतो नरः संसिद्धिं परमपदप्राप्तिं लभते। स्वकर्मनिरतो यथा सिद्धिं विन्दति परमं पदं प्राप्नोति तथा श्रृणु।
Sanskrit Commentary By Sri Ramanuja ।।18.45।। स्वे स्वे यथोदिते कर्मणि अभिरतो नरः संसिद्धिं परमपदप्राप्तिं लभते। स्वकर्मनिरतो यथा सिद्धिं विन्दति परमं पदं प्राप्नोति तथा श्रृणु।