Sbg 17.4 htshg

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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।17.4।।इसलिये कार्यरूप चिह्नसे अर्थात् ( उन श्रद्धाओंके कारण होनेवाली ) देवादिकी पूजासे?,सात्त्विक आदि निष्ठाओंका अनुमान कर लेना चाहिये? यह कहते हैं --, सात्त्विक निष्ठावाले पुरुष देवोंका पूजन करते हैं? राजसी पुरुष यक्ष और राक्षसोंका तथा अन्य जो तामसी मनुष हैं? वे प्रेतों और सप्तमातृकादि भूतगणोंका पूजन किया करते हैं।