Sbg 17.26 hcchi

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Hindi Commentary By Swami Chinmayananda ।।17.26।। सत्यता और साधुता तथा कर्म की प्रशस्तता को सत् शब्द के द्वारा लक्षित किया जाता है। हम सब आपेक्षिक सत्यत्व वाले जगत् में रहते हैं। हमारे लिए यह स्वाभाविक है कि अपने शरीर? मन और बुद्धि के द्वारा अनुभूयमान इस जगत् को ही हम पारमार्थिक सत्य समझ लें। अत सत् शब्द के द्वारा हमें यह स्मरण कराया जाता है कि पारमार्थिक सत्य इस आपेक्षिक सत्य रूप जगत् का भी अधिष्ठान है।