Sbg 17.13 htshg
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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।17.13।।जो यज्ञ शास्त्रविधिसे रहित -- शास्त्रोक्त प्रकारसे विपरीत और असृष्टान्न होता है अर्थात् जिस यज्ञमें ब्राह्मणोंको अन्न नहीं दिया जाता तथा जो मन्त्रहीन -- मन्त्र? स्वर और वर्णसे रहित? एवं बतलायी हुई दक्षिणा और श्रद्धासे भी रहित होता है? उस यज्ञको ( श्रेष्ठ पुरुष ) तामसी -- तमोगुणसे किया हुआ बतलाते हैं।