Sbg 16.22 htshg
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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।16.22।।हे कुन्तीपुत्र ये काम आदि दुःख और मोहरूप अन्धकारमय नरकके द्वार हैं इन तीनों अवगुणोंसे छूटा हुआ मनुष्य आचरण करता है -- साधन करता है। क्या साधन करता है आत्मकल्याणका साधन? पहले जिन कामादिके वशमें होनेसे नहीं करता था? अब उनका नाश हो जानेसे करता है? और उस साधनसे ( वह ) परमगतिको? अर्थात् मोक्षको भी प्राप्त कर लेता है।