Sbg 16.17 scanand
Jump to navigation
Jump to search
Sanskrit Commentary By Sri Anandgiri ।।16.17।।ननु तेषामपि केषांचिद्वैदिके कर्मणि यागदानादौ प्रवृत्तिप्रतिपत्तेरयुक्तं वैतरण्यादौ पतनमिति चेत्तत्राह -- आत्मेति।
Sanskrit Commentary By Sri Anandgiri ।।16.17।।ननु तेषामपि केषांचिद्वैदिके कर्मणि यागदानादौ प्रवृत्तिप्रतिपत्तेरयुक्तं वैतरण्यादौ पतनमिति चेत्तत्राह -- आत्मेति।