Sbg 15.8 htshg
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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।15.8।।किस कालमें ( आकर्षित करता है )
जब यह देहादिसंघातका स्वामी जीवात्मा शरीरको छोड़कर जाता है तब ( इनको ) आकर्षित करता है।,पहले और इस श्लोकके अर्थकी संगतिके वशसे श्लोकके दूसरे पादकी व्याख्या पहले की गयी है। तथा जब यह जीवात्मा? पहले शरीरसे ( निकलकर ) दूसरे शरीरको पाता है? तब मनसहित इन छः इन्द्रियोंको साथ लेकर जाता है। कैसे लेकर जाता है सो बतलाते हैं -- जैसे वायु गन्धके स्थानोंसे यानी पुष्पादिसे गन्धको लेकर जाता है? वैसे ही।