Sbg 15.6 scanand
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Sanskrit Commentary By Sri Anandgiri ।।15.6।।तच्चेत्पदं वेद्यं कर्तुरन्यत्कर्मेति द्वैतापातोऽवेद्यं चेदपुमर्थत्वात्प्रेप्सितत्वासिद्धिरित्याशङ्क्याह -- तदेवेति।
Sanskrit Commentary By Sri Anandgiri ।।15.6।।तच्चेत्पदं वेद्यं कर्तुरन्यत्कर्मेति द्वैतापातोऽवेद्यं चेदपुमर्थत्वात्प्रेप्सितत्वासिद्धिरित्याशङ्क्याह -- तदेवेति।