Sbg 15.18 htshg

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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।15.18।।उपर्युक्त ईश्वरका पुरुषोत्तम् यह नाम प्रसिद्ध है? उसका यह नाम किस कारणसे हुआ इसकी हेतुसहित उपपत्ति बतलाकर? नामकी सार्थकता दिखलाते हुए भगवान् अपने स्वरूपको प्रकट करते हैं कि मैं निरतिशय ईश्वर हूँ --, क्योंकि मैं क्षरभावसे अतीत हूँ अर्थात् अश्वत्थ नामक मायामय संसारवृक्षका अतिक्रमण किये हुए हूँ और संसारवृक्षके बीजस्वरूप अक्षरसे ( मूल प्रकृतिसे ) भी उत्तम -- अतिशय उत्कृष्ट अथवा अतिशय उच्च हूँ। इसीलिये अर्थात् क्षर और अक्षरसे उत्तम होनेके कारण? लोक और वेदमें? मैं पुरुषोत्तम नामसे विख्यात हूँ। भक्तजन मुझे इसी प्रकार जानते हैं और कविजन भी काव्यादिमें इसी नामका प्रयोग करते हैं अर्थात् पुरुषोत्तम् इसी नामसे ही मेरा वर्णन करते हैं।