Sbg 15.15 htshg

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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।15.15।।तथा --, मैं समस्त प्राणिमात्रका आत्मा होकर उनके अन्तःकरणमें स्थित हूँ। इसलिये समस्त प्राणियोंके स्मृति? ज्ञान और उनका लोप भी मुझ आत्मासे ही किया जाता है? अर्थात् जिन पुण्यकर्मा प्राणियोंको उनके पुण्यकर्मोंके अनुसार ज्ञान और स्मृति प्राप्त होते हैं तथा जिन पापाचारियोंके ज्ञान और स्मृतिका उनके पापकर्मानुसार लोप होता है ( वह मुझसे ही होता है )। समस्त वेदोंद्वारा मैं परमात्मा ही जाननेयोग्य हूँ। तथा वेदान्तका कर्ता? अर्थात् वेदान्तार्थके सम्प्रदायका कर्ता और वेदके अर्थको समझनेवाला भी मैं ही हूँ। यदादित्यगतं तेजः इत्यादि चार श्लोकोंद्वारा नारायण नामक भगवान् ईश्वरकी? विशेषउत्तम उपाधियोंसे,होनेवाली विभूतियाँ संक्षेपसे कही गयीं।