Sbg 15.11 htshg
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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।15.11।।और कई एक --, प्रयत्न करनेवाले? समाहितचित्त योगीजन? इस आत्माको? जिसका कि प्रकरण चल रहा है? अपने अन्तःकरणमें स्थित देखते हैं अर्थात् यही मैं हूँ इस प्रकार आत्मस्वरूपका साक्षात् किया करते हैं। परंतु जिन्होंने तप और इन्द्रियजय आदि साधनोंद्वारा अपने अन्तःकरणका संस्कार नहीं किया है? जो बुरे आचरणोंसे उपराम नहीं हुए हैं? जो अशान्त और घमण्डी हैं? वे अविवेकी पुरुष? शास्त्रादिके प्रमाणोंसे प्रयत्न करते हुए भी? इस आत्माको नहीं देख पाते।