Sbg 14.21 htshg
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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।14.21।।( शरीरधारी जीव ) जीता हुआ ही गुणोंको अतिक्रम करके अमृतका अनुभव करता है इस प्रश्नबीजको पाकर अर्जुन बोला --, हे प्रभो इन पूर्ववर्णित तीनों गुणोंसे अतीत -- पार हुआ पुरुष किनकिन लक्षणोंसे युक्त होता है और वह कैसे आचरणवाला होता है अर्थात् उसके आचरण कैसे होते हैं तथा किस प्रकारसे ( किस उपायसे ) मनुष्य इन तीनों गुणोंसे अतीत हो सकता है।