Sbg 14.1 hcrskd

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Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।14.1।। व्याख्या-- 'परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम्'-- तेरहवें अध्यायके अठारहवें, तेईसवें और चौंतीसवें श्लोकमें भगवान्ने क्षेत्र-क्षेत्रज्ञका, प्रकृतिपुरुषका जो ज्ञान (विवेक) बताया था, उसी ज्ञानको फिर बतानेके लिये भगवान् 'भूयः प्रवक्ष्यामि' पदोंसे प्रतिज्ञा करते हैं।