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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।13.4।।इदं शरीरम् इत्यादि श्लोकोंद्वारा उपदेश किये हुए क्षेत्राध्यायके अर्थका संक्षेपरूप यह तत्क्षेत्रं यच्च इत्यादि श्लोक कहा जाता है क्योंकि जिस अर्थका विस्तारपूर्वक वर्णन करना हो? उसका संक्षेप पहले कह देना उचित ही है --, जिसका पहले इदं शरीरम् इत्यादि ( वाक्य ) से वर्णन किया गया है? यहाँ तत् शब्दसे उसीका संकेत करते हैं। यह जो पूर्वोवत क्षेत्र है वह जैसा है अर्थात् अपने धर्मोंके कारण वह जिस प्रकारका है तथा जैसे विकारोंवाला है और जिस कारणसे जो कार्य उत्पन्न होता है -- यहाँ च शब्द समुच्चयके लिये है और कार्य उत्पन्न होता है यह वाक्यशेष है। तथा जिसे क्षेत्रज्ञ कहा गया है वह भी जिस प्रभाववाला अर्थात् जिनजिन उपाधिकृत शक्तियोंवाला है? उन क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ दोनोंका उपर्युक्त विक्षेषणोंसे युक्त यथार्थ स्वरूप तू मुझसे संक्षेपसे सुन अर्थात् सुनकर निश्चय कर।