Sbg 12.8 htshg
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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।12.8।।जब कि यह बात है तो --, तू मुझ विश्वरूप ईश्वरमें ही अपने संकल्प विकल्पात्मक मनको स्थिर कर और मुझमें ही निश्चय करनेवाली बुद्धिको स्थिर कर -- लगा। उससे तेरा क्या ( लाभ ) होगा सो सुन -- इसके पश्चात् अर्थात् शरीरका पतन होनेके उपरान्त तू निःसन्देह एकात्मभावसे मुझमें ही निवास करेगा? इसमें कुछ भी संशय नहीं है अर्थात् इस विषयमें संशय नहीं करना चाहिये।