Sbg 11.19 htshg
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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.19।। तथा --, ( मैं ) आपको आदि? मध्य और अन्तसे रहित अर्थात् जिसका आदि? मध्य और अन्त नहीं है? ऐसे रूपवाला और अनन्तवीर्य -- अनन्त सामर्थ्यसे युक्त देखता हूँ? आपकी सामर्थ्यका अन्त नहीं है? इसलिये आप अनन्तवीर्य हैं तथा मैं आपको अनन्त भुजाओंसे युक्त? चन्द्रमा और सूर्यरूप नेत्रोंवाला? प्रज्वलित अग्निरूप मुखोंवाला और अपने तेजसे इस जगत्को तपायमान करते हुए देखता हूँ अर्थात् जिस रूपके अनन्त हाथ हों? चन्द्रमा और सूर्य ही जिसके नेत्र हों? प्रज्वलित अग्नि ही जिसका मुख हो और जो अपने तेजसे इस सारे विश्वको तपायमान करता हो? ऐसा रूप धारण किये आपको देख रहा हूँ।