Sbg 11.11 htshg
Jump to navigation
Jump to search
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.11।।तथा --, जिस ईश्वरने दिव्य पुष्पमालाओं और वस्त्रोंको धारण कर रक्खा है? जिसने दिव्य गन्धका अनुलेपन कर रक्खा है? जो समस्त आश्चर्यमय दृश्योंसे युक्त है? जो सब भूतोंका आत्मा होनेके कारण सब ओर मुखवाला है तथा जिसका अन्त नहीं है ऐसा अनन्त और दिव्य विराट्रूप भगवान्ने अर्जुनको दिखलाया? इस प्रकार पूर्वश्लोकसे अन्वय कर लेना चाहिये अथवा अर्जुनने ऐसा रूप देखा इस प्रकार अध्याहार कर लेना चाहिये।
,