Sbg 10.10 htshg
Jump to navigation
Jump to search
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।10.10।।जो पुरुष मुझमें प्रेम रखते हुए उपर्युक्त प्रकारसे मेरा भजन करते हैं --, उन समस्त बाह्य तृष्णाओंसे रहित निरन्तर तत्पर होकर भजन -- सेवन करनेवाले पुरुषोंको? किसी वस्तुकी इच्छा आदि कारणोंसे भजनेवालोंको नहीं? किंतु प्रीतिपूर्वक भजनेवालोंको यानी प्रेमपूर्वक मेरा भजन करनेवालोंको? मैं वह बुद्धियोग देता हूँ। मेरे तत्त्वके यथार्थ ज्ञानका नाम बुद्धि है? उससे युक्त होना ही बुद्धियोग है। वह ऐसा बुद्धियोग मैं ( उनको ) देता हूँ कि जिस पूर्णज्ञानरूप बुद्धियोगसे वे मुझ आत्मरूप परमेश्वरको आत्मरूपसे समझ लेते हैं। वे कौन हैं जो मच्चित्ताः आदि ऊपर कहे हुए प्रकारोंसे मेरा भजन करते हैं।
,