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Hindi Commentary By Swami Chinmayananda ।।1.9।। एक अत्याचारी तानाशाह का गर्व और दम्भ देखो कितना है कि वह कहता है कि इतनी विशाल सेना और उसके प्रमुख वीर मेरे लिये प्राणोत्सर्ग करने के लिये तैयार हैं। महाभारत के सजग अध्येता जानते हैं कि यदि भीष्म पितामह कौरवों की ओर से युद्ध न करते तो कितने लोग वास्तव में दुर्योधन के लिये प्राणदान के लिये तैयार होते

भीष्म के द्वारा हमारी रक्षित सेना अपर्याप्त है किन्तु भीम द्वारा रक्षित उनकी सेना पर्याप्त है अथवा