1/1/20

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प्रवृत्तिदोषजनितोऽर्थः फलम् 1/1/20


संधि विच्छेद:

  1. प्रवृत्ति + दोष + जनितः + अर्थः + फलम्
    • प्रवृत्ति: कार्य करने की प्रवृत्ति, गतिविधि।
    • दोष: त्रुटि या कमी।
    • जनितः: उत्पन्न हुआ।
    • अर्थः: उद्देश्य या परिणाम।
    • फलम्: अंतिम परिणाम, फल।

संधि में जनितः + अर्थः का संधि स्वरूप जनितोऽर्थः है।


अर्थ:

यह श्लोक यह कहता है कि:

प्रवृत्तिदोषजनितः: कार्य में हुई त्रुटि से उत्पन्न।

अर्थः फलम्: उसका परिणाम (फल)।

अर्थात, किसी कार्य में दोष (त्रुटि) होने पर जो उद्देश्य प्राप्त होता है, वह परिणामस्वरूप त्रुटिपूर्ण या अनुकूल नहीं होता।


व्याख्या:

  1. दार्शनिक दृष्टि से:
    • यह श्लोक दर्शाता है कि कार्य (प्रवृत्ति) में दोष या त्रुटि होने पर जो फल प्राप्त होता है, वह दोषपूर्ण होता है।
    • दोषपूर्ण प्रवृत्ति का अर्थ है कि कार्य को सही तरीके से नहीं किया गया या उसके पीछे की मंशा अनुचित थी।
    • उदाहरण: यदि खेती में बीज सही न बोया जाए, तो फसल अच्छी नहीं होगी।
  2. कर्म सिद्धांत:
    • हर कार्य का एक कारण और परिणाम होता है।
    • यदि कार्य त्रुटिपूर्ण हो, तो परिणाम भी उसी प्रकार से प्रभावित होता है।
    • यह कर्म और उसके फल के सिद्धांत को स्पष्ट करता है।
  3. आध्यात्मिक दृष्टि से:
    • व्यक्ति की प्रवृत्ति (कार्य और व्यवहार) का आधार नैतिकता और शुद्धता होनी चाहिए।
    • यदि कार्य दोषयुक्त है (जैसे—असत्य, हिंसा, या अनुचित साधन), तो उसका फल भी बुरा ही होगा।
  4. व्यावहारिक दृष्टि से:
    • दैनिक जीवन में यदि किसी कार्य को अनुचित तरीके से किया जाए, तो उसकी गुणवत्ता प्रभावित होगी।
    • उदाहरण:
      • पढ़ाई में आलस्य (दोष) हो, तो परीक्षा का परिणाम (फल) अच्छा नहीं होगा।
      • व्यापार में बेईमानी (दोष) हो, तो प्रतिष्ठा और लाभ दोनों प्रभावित होंगे।

उदाहरण:

  1. गीता का संदर्भ:
    • श्रीमद्भगवद्गीता (3.9) में कहा गया है कि कार्य को बिना स्वार्थ और दोष के किया जाए तो उसका फल शुद्ध होता है।
  2. तार्किक दृष्टि:
    • यदि किसी प्रक्रिया में गड़बड़ी हो, तो उसका परिणाम भी खराब ही होगा।
    • यह वैज्ञानिक और तार्किक नियम भी है।

निष्कर्ष:

प्रवृत्तिदोषजनितोऽर्थः फलम् श्लोक हमें यह सिखाता है कि कार्य में त्रुटि होने पर उसका परिणाम भी त्रुटिपूर्ण होता है। यह कर्म की शुद्धता और नैतिकता पर बल देता है और जीवन में अच्छे परिणाम पाने के लिए दोषमुक्त प्रवृत्ति अपनाने की प्रेरणा देता है।