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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।6.36।।परंतु जिसका अन्तःकरण वशमें किया हुआ नहीं है उस मनको वशमें न करनेवाले पुरुषद्वारा अर्थात् जिसका अन्तःकरण अभ्यास और वैराग्यद्वारा संयत किया हुआ नहीं है ऐसे पुरुषद्वारा योग प्राप्त किया जाना कठिन है अर्थात् उसको योग कठिनतासे प्राप्त हो सकता है यह मेरा निश्चय है। परंतु जो स्वाधीन मनवाला है जिसका मन अभ्यासवैराग्यद्वारा वशमें किया हुआ है और जो फिर भी बारंबार यत्न करता ही जाता है ऐसे पुरुषद्वारा पूर्वोक्त उपायोंसे यह योग प्राप्त किया जा सकता है।