Sbg 6.33 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।6.33।।इस उपर्युक्त पूर्णज्ञानरूप योगको कठिनतासे सम्पादन किया जानेयोग्य समझकर उसकीप्राप्तिके निश्चित उपायको सुननेकी इच्छावाला अर्जुन बोला हे मधुसूदन आपने जो यह समत्वभावरूप योग कहा है मनकी चञ्चलताके कारण मैं इस योगकी अचल स्थिति नहीं देखता हैँ यह बात प्रसिद्ध है।