Sbg 6.25 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।6.25।।शनैःशनैः अर्थात् सहसा नहीं क्रमक्रमसे उपरतिको प्राप्त करे। किसके द्वारा बुद्धिद्वारा। कैसी बुद्धिद्वारा धैर्यसे धारण की हुई अर्थात् धैर्ययुक्त बुद्धिद्वारा। तथा मनको आत्मामें स्थित करके अर्थात् यह सब कुछ आत्मा ही है उससे अतिरिक्त अन्य कुछ भी नहीं है इस प्रकार मनको आत्मामें अचल करके अन्य किसी वस्तुका भी चिन्तन न करे। यह योगकी परम श्रेष्ठ विधि है।